Category: डायरी

कर्म

हीरों से जड़ा सोने का आभूषण, हीरे का कहलाता है। सोने जैसी काया में, शुभ/धार्मिक कर्म रूपी हीरा जड़ जाने से, उसमें निखार आजाता है / उसका महत्व

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क्रोध

बर्फ से पूछा – आप हमेशा ठंडी क्यों रहती हो ? बर्फ – मैं बड़ी महनत करके पानी से बनी , गरम हुई तो फिर

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Continuity

Be like a postage stamp. Stick to one thing until you get there. (धर्म में इसे अमूढ-द्रष्टि कहते हैं)

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वैभव

तजुर्बा है मेरा… मिट्टी की पकड़ मजबूत होती है, संगमरमर पर तो पैर फिसलते देखा है मैंने । (नितिन)

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अंतरंग

गुब्बारा ऊपर उठते उठते संदेश देता है… “वो जो बाहर है वह नहीं, भीतर वाला ही ऊपर ले जाता है” (अंजना)

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परोपकार

वृक्ष की छाया उसे (वृक्ष) कभी भी प्राप्त नहीं होती, पर वृक्ष की छाया के बिना पृथ्वी जल नहीं जायेगी ? और जब पृथ्वी जलेगी

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क्रोध

यदि क्रोध आ ही जाये तो अपने आपको मत भूलो । ब्र. नीलेश भैया

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मंगल आशीष

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