Category: पहला कदम

चतुष्टय

स्वचतुष्टय = स्व(द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव)। स्वचतुष्टय से ही अनंतचतुष्टय । भाव ठीक नहीं पर दोष गढ़ते हैं बाकी 3(द्रव्य, क्षेत्र, काल) पर। अपनों के

Read More »

सूतक

सूतक में दर्शन करने तो जाते ही हैं यानी फर्श को छूते हैं, जो नवदेवता में से एक है। फिर फर्श पर रखी हुई चीजें

Read More »

क्षायिक-दान

सिद्धों में क्षायिक-दान कैसे घटित करेंगे ? सिद्धों को ध्यान/ अनुभूति में अपने पास लाकर अभय का अनुभव कर। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र

Read More »

समर्पण

समर्पण में अपने व्यक्तित्व, अस्तित्व को मिटाया जाता है। जैसे आचार्य श्री समयसागर जी ४० वर्ष तक आचार्य श्री के संघ में मौनी बनकर रहे।

Read More »

वचन / भाषा

दो इन्द्रिय से पाँच इन्द्रिय तक वचन/ भाषा अक्षरात्मक तथा अनक्षरात्मक भी होती है। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 2/3)

Read More »

दु:ख

दु:ख हमारे जीवन में पाप से आते हैं। परिग्रह एक पाप है यानी हमारे जीवन में दुःख परिग्रह से आ रहे हैं। फिर वह परिग्रह

Read More »

जन्म कल्याणक

क्या मुनिराज पंचकल्याणक के अवसर पर जन्म कल्याणक में शामिल हो सकते हैं? आगम में आया है कि जब भगवान का पांडुकशिला पर जन्माभिषेक होता

Read More »

मतांतर

आचार्य श्री विद्यासागर जी के प्रवचनों में देखा जाता था कि पहले जो उनके प्रवचन होते थे, बाद में उससे हटकर हो गए थे, ऐसा

Read More »

उपचार

कफ आदि विकृतियों के लिए जल उपचार… कफ के लिए जल को इतना उबालें कि एक चौथाई रह जाय, पित्त के लिए आधा, वात के

Read More »

वेदों की तीव्रता

नपुंसकों के वेद की तीव्रता भट्टी की आग जैसी यानी बहुत तेज होती है। एक इंद्रिय से चार इंद्रियों वाले नपुंसक होते हैं, क्या उनकी

Read More »

मंगल आशीष

Archives

Archives
Recent Comments

November 23, 2025

March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031