Category: वचनामृत – अन्य

भगवान

सबसे पहले भाषा अच्छी होनी चाहिए, फिर भावना (गिरे हुओं को झुककर उठाने की भावना), अंत में भाग्यवान, बस बन जाओ भगवान । मुनि श्री

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ज्ञान

ज्ञान पाने के 4 चरण गुरु विनय स्वयं का अभ्यास/पुरूषार्थ पुण्य/समय आना मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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गलती

गलती होने पर निरीह बनकर, क्षमा मत मांगो, दंड़ (प्रायश्चित) मांगो । ताकि उधारी (कर्मों की) समाप्त हो जाये, हिसाब बराबर हो जाये । मुनि

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आलोचना

आलोचना करना तो छूटेगा नहीं, दूसरे की करोगे तो पाप लगेगा, करना ही है तो अपनी करो ताकि पाप कटें । मुनि श्री कुंथुसागर जी

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भगवान/गुरू से मांगना

किसान दाना बोते समय भूसे की इच्छा नहीं, दाने* की ही भावना भाता है ; भूसा** तो अपने आप मिल जाता है । भूसे की

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संस्कार

अपने बच्चों को उत्तम कुल/लौकिक पढ़ाई/वैभव रूपी वाण तो दिये हैं पर संस्कार रूपी धनुष नहीं दिया। वे संसार का युद्ध कैसे जीत पायेंगे ?

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पाप

कच्चा पारा और पका पाप छुपते नहीं हैं, शरीर से फूट फूट कर निकलते हैं । मुनि श्री कुंथुसागर जी

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स्वप्न

99% सपने और जो बार बार एक ही स्वप्न आये तो उनका महत्व कुछ भी नहीं होता । मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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बोलना

बोलने में जितनी शक्ति लगती है ,उससे दुगनी शक्ति बोलना रोकने में लगती है । मुनि श्री कुंथुसागर जी

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संगति

जब निर्जीव खरबूजा खरबूजे को देखकर रंग बदल सकता है, तो हम तो सजीव हैं तो अच्छी/बुरी संगति का असर हम पर नहीं होगा ?

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मंगल आशीष

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