Category: वचनामृत – अन्य

पूजन

पूज्यों की पूजा, पुजारी बनकर(भिखारी बनकर नहीं), पूज्य बनने के लिये । मुनि श्री उत्तम सागर जी

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संस्कृति

हमारी संस्कृति कहती है – संसार से भागो मत और संसार को भोगो मत, बस जागो । मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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दर्पण

दर्पण निहारना – माने हारना । (अशाश्वत/नश्वर शरीर के हाथों, शाश्वत/नित्य आत्मा की अस्वीकृति) आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी

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भगवान के दर्शन

भगवान के दर्शन करने नहीं, भगवान में अपने दर्शन करने के लिये जाना चाहिये । औषधि इसलिये ली जाती है ताकि आगे औषधि ना खानी

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Beauty

We always worry about our looks… But the truth is that they neither matter to those who love us nor to those who don’t love

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ज्ञान/वैराग्य

ज्ञान तुम्हारे जीवन की दिशा निर्धारित करता है और वैराग्य जीवन की दशा को परिवर्तित करता है । मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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उधारी

किसी की भी उधारी लेकर मर जाना, पर भगवान की उधारी लेकर मत जाना क्योंकि भगवान तो किसी की उधारी अपने पास रखते नहीं हैं,

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चिंतन

नीचे स्तर का चिंतन तो चिंता है, अवनति का कारण है । आचार्य श्री विशुद्धसागर जी

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Friendship

Whom do you love the most! Yourself ? If yes, why are you after others ? By doing so, in the long run, you will

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दृष्टि

वस्तु/व्यक्ति,  “बाजा”  है जो अच्छा या बुरा नहीं होता, उससे निकली  “ध्वनि” , दृष्टि है जो शुभ और अशुभ होती है । इसी बाजे से

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मंगल आशीष

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