Category: वचनामृत – अन्य

समस्या

यदि किसी राह पर चलते हुये आपके सामने एक भी समस्या नहीं आए,  तो समझ लेना कि आप गलत रास्ते पर जा रहे हैं। स्वामी विवेकानंद जी

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वरदान

जब अपनी इच्छायें नहीं रह जातीं तब वे दूसरों की इच्छाओं को पूरा कर सकते हैं । इसीलिये बुजुर्गों ( तथा साधूओं ) से आर्शीवाद लिया जाता

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देव/शास्त्र/गुरु

देव, शास्त्र, गुरु को जिन्होंने अपना मालिक बना लिया है, उनके जीवन में कर्म चोर, मालिक को देखकर भाग जाते हैं । मुनि श्री सौरभसागर

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एकता

एक ऊँगली से चखा तो जा सकता है, पर पेट भरने के लिये तो पाँचों ऊँगलियों का प्रयोग करना होगा । मुनि श्री सौरभसागर जी

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भक्त

मेघगर्जन सुनकर मयूर नाचने लगता है, ऐसे ही भक्त भगवान का नाम सुनकर झूमने लगता है । मुनि श्री सौरभसागर जी

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मन

मन दो अक्षरों से मिलकर बना है – ‘म’ – मोक्ष के लिये, ‘न’ – नरक के लिये । मन को वश में कर लो

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उत्साह/खुशी

देव, शास्त्र, गुरु, के पास जितने उत्साह/खुश मन से आओगे, उतनी ही खुशी लेकर जाओगे । मुनि श्री सौरभसागर जी

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संगति

साधु संगति की महिमा दूध पानी जैसी है, पानी दूध के साथ मिलकर दूध के भाव ही बिकने लगता है । मुनि श्री कुन्थुसागर जी (पर

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ध्यान

ध्यान कहीं भी, किसी समय भी, किसी जगह पर भी । आचार्य श्री वीरसेन जी

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मंगल आशीष

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