Category: वचनामृत – अन्य
चारित्र
मंदिर का निर्माण कारीगर ऊपर चढ़कर ही करता है । चारित्र की सीढ़ी पर चढ़े बिना व्यक्तित्व (धर्म) का निर्माण सम्भव नहीं है । आर्यिका
सम्भावना
दूज के चाँद का इतना महत्व क्यों है ? क्योंकि उसमें सम्भावनायें (प्रगति की/पूर्ण चंद्र बनने की) सबसे ज्यादा होती हैं । पं श्री जवाहरलाल
सच्चा गुरु
हम सबको सच्चे गुरु की तलाश होती है, सच्चा गुरु तब मिलता है जब हम सच्चे शिष्य बन जाऐं । मुनि श्री प्रतीकसागर जी
समयाभाव
कुछ लोग हमेशा यह शिकायत करते हैं कि ‘वक्त नहीं मिलता’, शायद इस कथन से ही ‘कमबख़्त’ (कम वक्त) शब्द बना होगा । ऐलक श्री
धर्म
शरीर रूपी बर्तन में काई/गंदगी तो लगेगी ही, इसे धर्म की राख से रोज़ाना साफ करना होगा । मुनि श्री सौरभसागर जी
विदाई
विदाई से पहले अंतरंग के गुणों की खुदाई कर लो । मुनि श्री सौरभसागर जी
फ़र्ज
जो कर्ज अदा करने का फ़र्ज निभाते हैं, उनके कोई मर्ज नहीं रहता । मुनि श्री सौरभसागर जी
व्यवहार
व्यवहार परिवार के साथ मोह पैदा करता है, समाज के साथ सेवा भाव पैदा करता है । और जो सेवा नहीं करते वे विकलांग हैं
अधिकार/कर्तव्य
अधिकार तब तक जब तक दूसरे को दु:ख न हो, कर्तव्य तब तक जब तक अपने को दु:ख न हो । मुनि श्री अतुलसागर जी
पुण्य/पाप
जब खर्च कर रहे हो तो मान के चलिए कि पुण्य की कमाई है, और जब दान दे रहे हो तो मान के चलिए कि पाप की
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