Category: वचनामृत – अन्य

बड़े

बड़े की पहचान – छोटी छोटी बातों से खुश नहीं, नाराज़ नहीं ।

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लोभ

आवश्यक के प्रति आकर्षण भी लोभ है । मुनि श्री कुंथुसागर जी

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स्वाभिमान

दिखावा करने वालों के स्वाभिमान नहीं होता । (वे तो दूसरों को ही महत्व देते रहते हैं ) मुनि श्री कुंथुसागर जी

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सुख

संसार में सुख, दर्पण में मुख होता नहीं, दिखता है । साधनों में नहीं साधना से, साध्य को पाने में मिलता है । आर्यिका श्री

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मान

हो कोड़ी के, मान पसेरी के । मुनि श्री कुंथुसागर जी

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तम्बाकू

सब चीजें खींचने से बढ़तीं है, बीड़ी, सिगरेट खींचने से घटती हैं, जीवन को घटाती हैं । गुटका उम्र को गुटक जाता है । मुनि

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बीमारी के कारण

कर्मफ़ल की अस्वीकृति आत्मग्लानी (प्रायश्चित के अभाव में) पर निन्दा / आत्मप्रशंसा भय क्षु.श्री ध्यान सा.जी

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कमजोर शब्द

1) चाहिये – इच्छा बढ़ेगी (“सकता” से योग्यता ) 2) पड़ेगा -मजबूरी 3) लेकिन – अच्छे को बुरे से जोड़्ता है 4) भूलना मत –

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मंगल आशीष

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