Category: डायरी
उत्तम आकिंचन्य धर्म
“कुछ भी मेरा नहीं” होने के भाव को ही आकिंचन्य कहते हैं। हल्का होना ऊपर उठना सिखाता है, बाह्य तथा अंतरंग धारणाओं से भी। एक
उत्तम त्याग धर्म
राग धूप है तथा त्याग छाँव। त्याग तो अवश्यम्भावी है,स्ववश किया तो आनंद परवश किया तो छटपटाहट। आचार्य ज्ञान सागर बताते थे… जो त्याग परवश
उत्तम तप धर्म
कर्मों को क्षय करने के लिए जो किया जाए उसे तप कहते हैं। गृहस्थों के लिए आजकल एक बड़ा तप है… सुबह जल्दी उठना। निशाचर
उत्तम संयम धर्म
फिटकरी का केमिकल फार्मूला,K2SO4.AI2(SO4)3.24H2O है। इतना कठिन सूत्र कितने सालों के बाद याद कैसे रहा ? लिखने लिखते ही आता है लिखने का हुनर, बच्चे
उत्तम सत्य धर्म
क्रोध, लोभ, भय और हँसी को त्यागने तथा शास्त्र के अनुसार वचन बोलने पर ही सत्य कहा जा सकता है। आचार्य श्री विद्यासागर जी कहा
उत्तम शौच धर्म
संतोष से निरुत्साह नहीं, क्योंकि संतोष उत्साह और उमंग की पूर्णता है। पास में रखी वस्तु जब बोझ लगे तब बोध में संतोष आता है।
उत्तम आर्जव धर्म
जितना आडंबर ज्यादा, उतनी उलझनें बढ़ती हैं। एक बार बाहर दिखाने का क्रम बन गया फिर वह दिखावा आपकी मजबूरी बन जाता है। दिखावे वाले
उत्तम मार्दव धर्म
मान रूपी बीज को जब माटी में मिलायेंगे तब सम्मान रूपी वृक्ष तैयार होगा। मेरा अपमान न हो जाए इसकी तो बहुत चिंता, पर मैं
उत्तम क्षमा
जो नज़रें झुकाए चलते हैं, दुनिया उनको नज़रें उठाए देखती है जैसे आचार्य श्री विद्यासागर जी जब हावड़ा ब्रिज से निकल रहे थे उनकी नज़रें
सत्य
अनुसंधान जब अतिसंधान बन जाता है तब सत्य, सत्याग्रह आंदोलन के रूप में परिवर्तित हो जाता है। तब सत्य पर ग्रहण लग जाता है, सत्य
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