Category: डायरी
स्व / पर
दो प्रकार के लोग → 1. स्वस्थानिक – जो अपनी आत्मा में रहते हैं। बड़ों से पूछो → कहाँ रहते हो ? जबाब – ग्वालियर,
पुण्योदय में पाप
पापोदय में पाप करते हैं यह तो समझ में आता है पर पुण्योदय में भी पाप करते हैं इसका क्या कारण ? सुभाष – महगांव
अति योजना
दूर बुद्धि* भी एक प्रकार की दुर्बुद्धि है। * बहुत ज्यादा और बहुत दूर की प्लानिंग करना। – ब्र डॉ नीलेश भैया जी
सकारात्मक सोच
संसार की बनावट है कि अभाव और उपलब्धि साथ-साथ चलती हैं। एक खरगोश किसान के खेत से रोज गाजर खाता था। बाड़ लगाने पर रोज
चेतना / शरीर
हम सब उत्पाद हैं, चेतना + पदार्थ (शरीर) के। चेतना, विचारपन देती है/ चाहना बढ़ाती है, गणित लगाती है, दुःख की निमित्त(कारण) है*। पदार्थ… विस्तारपना
महिलाओं को नौकरी
क्या महिलाओं को नौकरी करनी चाहिए ? (यदि इमरजेंसी हो तो) चाकरी को अधम कहा गया है। नौकरी में पराधीनता है जबकि सुख स्वाधीनता में
देव दर्शन
भगवान की मूर्ति के दर्शन पहले खुली आँखों से करें, उनके रूप को अपने अंतस् में भर लें। फिर आँख बंद करके उस रूप का
थाली में जूठन
थाली में जूठन छोड़ने से नकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है। अन्न को अन्य मत मानो। अपनी भूख पहचानो तभी अपने को पहचान पाओगे। किसी के
परमात्मा बनने की विधि
परमात्मा बनने की विधि…. गुणवानों का गुणगान करने से खुद गुणवान बनेंगे तब धर्म जीवन में आएगा, धर्मात्मा हो जाएँगे। फिर पुण्यात्मा और उससे बन
अपनी पहचान
एक समृद्ध गुरुकुल खुला। जो भी पढ़ने आता उससे एक ही प्रश्न किया जाता – “तुम कौन हो ?” बच्चे नाम बताते। योग्य नहीं हो।
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