Category: डायरी

गुरु

एक गुरु ने अपने शिष्य को लाठी चलाने की शिक्षा पूर्ण कर दी। शिष्य माहिर भी हो गया पर उसे गुमान आ गया कि वह

Read More »

मैं क्या हूँ ?

अच्छा वक्त दुनिया को बताता है कि मैं क्या हूँ, बुरे वक्त में दुनिया बताती है कि मैं क्या हूँ। आर्यिका श्री पूर्णमति माता जी

Read More »

सुख

शैतान बच्चे ने तीन बकरियों पर एक, दो और चार नम्बर डाल कर स्कूल में घुसा दिया। सब लोग बकरियों को पकड़ने लगे। तीन बकरियाँ

Read More »

दु:ख

“सुख रत्ती भर भी कम न हो, दु:ख पल भर भी टिके नहीं।” ऐसी चाहना ही सबसे बड़ा दु:ख है। साधु दु:ख स्वीकारते हैं इसलिए

Read More »

मंदिर

मन को मंदिर कैसे बनाएँ ? जिस मन में हर समय प्रभु का नाम स्मरण हो, वह मन प्रभु का मंदिर बन गया न !

Read More »

फूल

चार प्रकार के फूल होते हैं… 1) सुंदर और *खुशबूदार । 2) सुंदर पर खुशबू नहीं । 3) सुंदर तो नहीं पर खुशबूदार । 4)

Read More »

राग-द्वेष

राग —> न रहे* तो रहा न जाए। द्वेष —> रहे** तो रहा न जाए। सारे युद्ध राग की वजह से ही हुए हैं। रावण

Read More »

भगवान / हम

भगवान और हमारे रंगों में फ़र्क नहीं –> वे भी काले, हम भी। फ़र्क सिर्फ़ इतना है –> वे ऊपर से काले हैं (पार्श्वनाथ आदि),

Read More »

मंगल आशीष

Archives

Archives

December 14, 2024

March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031