Category: वचनामृत – अन्य
रसोई
रसोई -जहाँ रस बरसे। Kitchen – जहाँ किच किच रहे। चौका – जहाँ शास्त्र की चौकी बनी रहे। मुनि श्री तरूण सागर जी फ़र्क हिन्दी और अँग्रेज़ी
भगवान
फ़कीर से एक राजा प्रभावित हो गया। अपने महल में रहने की प्रार्थना की । फ़कीर ने दो शर्तें लगायीं :- मैं जब सोऊँ, तो
व्यक्ति
जिसमें भगवान व्यक्त होने की संभावना हो वह व्यक्ति है । संत श्री दीपक भाई
मूर्तिक
हम कितने होशियार हैं – हमने ज्ञान को पुस्तक में, काल को घड़ी में और अमूर्तिक को मूर्तिक में बदल लिया है । हम मूर्तिक
निर्माण
मंदिर का निर्माण कारीगर ऊपर चढ़कर ही करता है । चारित्र की सीढ़ी पर चढ़े बिना, व्यक्तित्व (धर्म) का निर्माण संभव नहीं है । आर्यिका
सत्यधर्म
धर्म तो सत्य है ही, फिर धर्म के आगे ‘सत्य’ लगाने की क्या ज़रूरत है ? क्योंकि आज असत्य को भी धर्म कहने लगे हैं
साधु/असाधु
साधु को सोने मत दो, असाधु को उठने मत दो । मुनि श्री तरूणसागर जी
शुभ/अशुभ
यदि पूर्व (शुभ) की ओर जाओगे, तो पश्चिम (अशुभ) स्वत: ही दूर होता जायेगा । आचार्य श्री विद्यानंद जी
आरम्भ
कमीज का यदि पहला बटन गलत लग गया तो आगे के सारे बटन गलत ही लगेंगे । (हो सकता है कि आखरी बटन पेंट के
जीवन
जीवन रेल की पटरी नहीं जो हमेशा समानांतर चले, यह तो गंगा की धारा जैसी होनी चाहिये जो कहीं गिरती है, कहीं रूकावटें आती हैं,
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