Category: वचनामृत – अन्य
साधु
श्रावक तो सम्यग्दृष्टि हो सकता है पर साधु तो अनेक श्रावकों के लिये सम्यग्दर्शन का निमित्त है, इसलिये इनको अपना आचरण निर्दोष रखना ही होगा
भगवान का प्रभाव
असाता/पापोदय की तपती धूप से भगवान रूपी घना वृक्ष स्वत: छाया देता है, मांगनी नहीं पड़ती है । क्षु. श्री गणेशप्रसाद जी वर्णी
पीत लेश्या
काम करने से पहले सोचता है । वात्सल्य का भाव बना रहता है । विवेक पूर्वक काम करता है । मनमानी नहीं करता है ।
श्रुतज्ञान
केवलज्ञान के लिये द्रव्य-श्रुत की आवश्यकता नहीं, जैसे शिवभूति महाराज का श्रुतज्ञान । पर भाव-श्रुत पूरा होना चाहिये । मुनि श्री समयसागर जी
धर्म
धर्म, अच्छे को ग्रहण करना और अच्छा बनना । मुनि श्री प्रमाणसागर जी
माला में मन
माला में मन इसलिये नहीं लगता क्योंकि सुबह से शाम तक वह चलायमान ही रहता है, वही संस्कार माला के समय रहते हैं । समाधान
भगवान के दर्शन
मंदिर में भगवान की मूर्ति में मूर्तिवान को देखते तो चेहरे पर मुस्कान ना आती ! जैसी प्रियजनों को देखते समय आ जाती है ।
प्रेरणा / जागृति
प्रेरणा थोड़े समय के लिये ही कार्य करती है, अंतर-जागृति, निरंतरता प्रदान करती है । क्षु.श्री ध्यानसागर जी
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