Category: वचनामृत – अन्य

ज़िंदा / मुर्दा

लोग ज़िंदों को गिराते हैं, मुर्दों को उठाते हैं, ये कैसे लोग हैं ? जो ज़िंदा को गिराते हैं वे मुर्दा होते हैं* और मुर्दा

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आचरण

प्राय: आचरण का अभिप्राय अच्छे काम करने से लिया जाता है, पर करने से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्या नहीं करना चाहिए । मुनि श्री

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अधर्म

वो क्रियायें जिन्हें करते करते ऊब जायें, फ़िर चाहे वे क्रियीयें धार्मिक ही क्यों ना हों । मुनि श्री सुधासागर जी

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सुनना

माईक की तरह नहीं सुनना, इधर सुना उधर बाहर । मुनि श्री निर्वेगसागर जी

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Busy

Busy रहना बुरा नहीं, Busy मानना बुरा है, Busy जैसा व्यवहार करना बुरा है । मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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नौकरी

भगवान ने गृहस्थ के षटकर्मों में खेती, शिल्प, लेखनादि बताये हैं पर नौकरी नहीं बतायी । ये तो दासता है, इसी को अधम चाकरी कहा

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मरण / उद्यापन

इन अवसरों पर भेंट/भोजन नहीं ग्रहण करना चाहिये, उनके परिवार/व्रती को देना चाहिए । मुनि श्री सुधासागर जी

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साधन / साध्य

देव, गुरू, शास्त्र को साधन ही नहीं, साध्य बनाएँ । मुनि श्री सुधासागर जी

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साधना

परिस्थिति को मन:स्थिति न बनने देना । क्षु. श्री ध्यानसागर जी

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पहचान

संबंधों से अपनी पहचान मत बनाना, वरना संबंध समाप्त होते ही आप ज़ीरो बन जाओगे । क्षु.श्री ध्यानसागर जी

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मंगल आशीष

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