राग से निवृत्ति के लिये ——–> वानप्रस्थ आश्रम।
वीतरागता में प्रवृत्ति के लिये –> व्रती आश्रम।

भविष्य वर्तमान का ही तो Extension है।
वर्तमान अच्छा तो, भविष्य अच्छा होगा ही। *

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

* (भूतकाल के दोषों को भी भुला दिया/ क्षमा कर दिया जायेगा)।

विशालता जिसकी कोई सीमा ना हो जैसे आकाश/ विचार/ भगवान का सुख, ज्ञान।
एक रूप/ न वृद्धि/ न ह्रास।
संसारी सुख कम-ज्यादा इसलिए विशाल नहीं।

मुनि श्री प्रणम्यसागर जी

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