छोटे भाई ने बड़े भाई का लड्डु मुँह में डाला ही था कि बड़े ने उसका मुँह दबाकर लड्डु निकाल लिया ।
छोटा – जितनी देर लड्डु मेरे मुँह में रहा, उतने समय का मिठास तो मैंने ले ही लिया !
धर्म याद नहीं होता तो कम से कम जितनी देर सुन रहे हो, उतनी देर मिठास तो आया ना !!

आर्यिका श्री वर्धस्वनंदनी जी

पाचन-शक्ति के अभाव में, अकेले घी पीने से कोई पहलवान नहीं बनता,
इसी तरह श्रद्धा/जिज्ञासा/प्रारम्भिक-ज्ञान बिना,अध्यात्म-ग्रंथ पढ़ लेने से कोई ज्ञानी नहीं बनता ।

दर्पण में छवि दुगनी दूरी पर बनती/दिखती है ।
दूसरे की दृष्टी से अपने आप को देखोगे तो बहुत दूरी से देखने के कारण सही नहीं देख पाओगे ।
फिर दूसरे के दर्पण में द्वेष/राग/हठग्राहिता/ईर्षा की धूल हो सकती है, अज्ञान का टेड़ापन हो सकता है ।

चिंतन

विज्ञान प्रयोगों पर आधारित, निर्णय बदलते रहते हैं,
वीतराग विज्ञान, आत्मानुभव पर आधारित, ना बदलने वाला ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

समीचीन उद्देश्य बनाने के लिये ज्ञान की आवश्यकता है,
पर उसे पूर्ण करने के लिये ध्यान की ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

क्या विदेशों के पेड़ ज्यादा हरे और ज्यादा घने होते हैं ?

नहीं, पर वे ज्यादा उगाते हैं/उनका रक्षण ज्यादा करते हैं ।
गुणों का भी यही स्वभाव है – कुछ लोग ज्यादा उगा लेते हैं/उनकी रक्षा करते रहते हैं, कुछ समाप्त कर लेते हैं ।

चिंतन

समस्या आने पर न्याय नहीं, समाधान होना चाहिये;
क्योंकि…
न्याय में एक के घर दीप जलते हैं,
लेकिन
दूसरे के घर अँधेरा होता है ।
मगर समाधान में…
दोनों के घर दीप जलते हैं ।

(सुरेश)

( विंगकमांडर अभिनंदन के लौटने से भारत में तो दीपक जलेंगे ही,पाकिस्तान के प्रति द्वेष की अग्नि भी कम होगी )

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April 8, 2022

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