हम लोग भी कितने अज़ीब हैं !
निशानियाँ महफ़ूज़ रखते हैं,
और
लोगों को खो देते हैं ।

(सुरेश)

दीपक दो प्रकार से जलाया जा सकता है –
1. माचिस पर तीली रगड़ करके – पुरुषार्थ
2. जलते हुए दीपक के सामीप्य से – संगति

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

शिष्य के ऊपर कालिख लग जाये तो चलेगा,
पर कालिख लगा गुरु नहीं चलेगा,
वरना
शिष्य अपनी कालिख किस दर्पण में देखेगा !
ना ही शिष्य ऐसा काम करे कि गुरु के नाम पर कालिख लग जाये ।

मुनि श्री सुधासागर जी

कौन कहता है, ख़ामोशियाँ ख़ामोश होती हैं !

कभी ख़ामोशियों को, ख़ामोशी से सुनो
ख़ामोशियाँ वो कह देती हैं…
जिनकी लफ़्जों को तलाश होती है ।

???????? सुरेश ????????

हमारी आयु बढ़ नहीं रही, दिन प्रतिदिन घट रही है ।
फिर भी हम बच्चों की तरह सांसारिक वस्तुओं के लिये लड़ते रहते हैं ।
जबकि मालूम है कि – खिलौना पाने वाला बच्चा भी, सोने के बाद खिलौना छोड़कर ही सोता है ।

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April 8, 2022

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