खुशी में हंसते हुये आँखें बंद हो जाती हैं, दु:ख/भय में और खुल जाती हैं ।
सही तो है – जब बाहर से दृष्टि अंदर की ओर जायेगी तभी तो आनंद आयेगा ।

चिंतन

समस्यायें ऊँटों के समूहों जैसी होती हैं – कुछ अपने आप बैठ जाते हैं, कुछ बिठाने से,
कुछ बैठते ही नहीं तथा कुछ बैठ कर फिर खड़े हो जाते हैं ।
ज्यादा सिरफोड़ी नहीं करना Normal पुरुषार्थ करो, बाकी को स्वीकार कर लो ।

पैर का काँटा, धर्म करने से नहीं पुरुषार्थ से निकलेगा ।
पर धर्मध्यान से काँटे की वेदना जरूर कम हो जायेगी ।

मुनि श्री सुधासागर जी

Archives

Archives

April 8, 2022

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930