Category: डायरी

आदिनाथ भगवान

आदिनाथ  भगवान का जन्मदिन श्रावकों के लिए विशेष महत्व का है । क्योंकि उन्होंने ही सर्वप्रथम जीवन  चलाने की पद्धति (खेती, व्यापार, कला, रक्षा आदि)

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निमित्त का कर्तव्य

बलवान निमित्त का कर्तव्य है कि वह कमज़ोर निमित्त को झूठ बोलने के लिये मज़बूर ना करे । जैसे उधारी वापस ना कर पाने वाले

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सुख / दुःख

सुख, व्यक्ति के अहंकार की परीक्षा लेता है, जब कि… दुःख, व्यक्ति के धैर्य की । दोनों परीक्षाओं में उत्तीर्ण व्यक्ति का जीवन ही सफल

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Relationship

Every Relationship is like a Glass. A Scratch on any side will reflect on other side. So always handle everyone’s feelings with Care & Respect.

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समर्पण

समर्पण = सम(सत्य)+अर्पण । अर्पण का दर्पण से गहरा संबंध है, दर्पण यानि देखकर कर चलना । बीज समर्पण करता है तो वटवृक्ष, बूँद <

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भाग्य भरोसे

आज गृहस्थ तथा साधु दोनों ही भाग्य भरोसे जी रहे हैं । फ़र्क सिर्फ इतना है कि गृहस्थ रो रो कर जीते हैं, साधु हँस

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शरणागत

डॉक्टरी में एक और महत्वपूर्ण शिक्षा दी जाती है – Case बिगड़ने पर Expert Specialist को कब/समय रहते बुलाना होगा । हमको भी यह मालूम

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अड़चनें

झरनों से इतना मधुर संगीत कभी न सुनाई देता, अगर राहों में उनके पत्थर न होते । ???????? सुरेश ????????

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मंगल आशीष

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