Category: डायरी
नमन
नमन में यदि न मन हो, तो नम न हमारा मन हो, ना ही नमन है । ब्र. नीलेश भैया
धर्मात्मा / कर्मात्मा
जो मरण से पहले छोड़े वह धर्मात्मा, कर्मात्मा मरण के बाद छोड़ता है (अंत तक कर्म में ही लगा रहता है)
घर में क्या रखें ?
पूजा के योग्य चीज़ें ना रखें । क्योंकि ऐसी वस्तुऐं रखते ही वह स्थान पूज्यनीय हो जाता है और घर पूज्यनीय नहीं है ।
पूँछना
प्रश्न पूँछने वाला थोड़े (उस) समय बुद्धु दिखता है, ना पूँछने वाला ज़िंदगी भर बुद्धु बना रहता है । (प्रांजल)
गति / स्थिरता
गति का महत्व, जब दिशा निर्धारित तथा सही हो । स्थिरता तब, जब गंतव्य पर पहुँच जांय या झंझावात से गुज़र रहे हों ।
प्रेम / वासना
जो सम्बधियों से सम्बंध तुड़वाने में निमित्त बने, वह वासना; जो सम्बंधों को बढ़ाये/द्रढ़ करे वह प्रेम ।
पावनता
उत्कृष्ट पावनता स्वयं के पावन होने में नहीं बल्कि दूसरों को पावन करने में है ।
अपराध / सज़ा
अपराधी को सज़ा से पाप कर्म कट भी सकता है और बढ़ भी सकता है । (अपराधी की मनःस्थिति के अनुसार)
मान
मान कम करने का एक कारगर तरीका… जिस क्षेत्र में मान है, उस क्षेत्र के अपने से बड़े के सानिध्य में रहो।
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