Category: डायरी

रिश्ते

पहले लोग भावुक होते थे, रिश्ते निभाते थे, फिर practical हुए, रिश्तों से फायदा उठाने लगे, अब professional हैं, रिश्ते उनसे ही रखते हैं, जिनसे

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पौरुष

सीख उस समन्दर से.. जो टकराने के लिए पत्थर ढूँढ़ता है । ???????? सुरेश ????????

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पक्षपात

जंगल कट रहा था, लेकिन फिर भी सारे पेड़ कुल्हाड़ी को ही वोट दे रहे थे, क्योंकि पेड़ समझते थे कि कुल्हाड़ी में लगी हुई

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परिणाम

परीक्षा हमेशा अकेले में होती हैं.. लेकिन उसका परिणाम सबके सामने होता है। इसलिए कोई भी कर्म करने से पहले परिणाम का जरूर विचार करलें

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धोखा

मनुष्य को धोखा मनुष्य नहीं देता, बल्कि वो उम्मीदें धोखा देती हैं, जो वो दूसरों से रखता है। ????????शैलेन्द्र????????

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व्यक्तित्व

व्यक्तित्व की गहराई को यदि ऊँचाई से नापने की कोशिश करोगे, तो माप गलत होगा ।

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संगति

मोम ताप के Source से दूर होने पर भी पिघलने लगता है, लाख पास आने पर, सोना चमकता है, मिट्टी पक जाती है ।

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बसंत

“बसंत आ गया”, याने “बस अंत आ गया” सही है, बसंत (जीवन का यौवन) के बाद तो ढ़लान शुरु हो जाती है, अंत की ओर

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समस्यायें

समस्यायें ऊँटों के समूहों जैसी होती हैं – कुछ अपने आप बैठ जाते हैं, कुछ बिठाने से, कुछ बैठते ही नहीं तथा कुछ बैठ कर

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मंगल आशीष

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