Category: डायरी

क्रोध और सहनशीलता

भीष्म और जटायु ने अपने-अपने जीवनकाल में एक एक पाप/पुण्य किये थे – भीष्म ने समय पर क्रोध ना करने का पाप, जटायु ने क्रोध

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भक्ति का प्रभाव

गाना जल्दी जल्दी गाओ तो आनंद नहीं आता । भक्ति का प्रभाव इसलिये नहीं हो रहा क्योंकि हम जल्दी-जल्दी निपटा रहे हैं, भाव सहित नहीं

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सपने

सपने चाहे दिवा के हों या रात्रि के, दोनों निद्रा टूटने पर छूट जाते हैं ।

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निस्पृहता

बच्चे रेत में बड़ी मेहनत से घरौंदे बनाते हैं, उन्हें प्रेम भी करते हैं, किसी को छूने भी नहीं देते हैं; पर चलते समय ख़ुद

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निद्रा

साधुजन साहूकारों जैसी निद्रा लेते हैं – अल्प और जागरूक । साहूकार अपनी निधि की रक्षा हेतु जागरुक रहता है, साधु आत्मरूपी अमूल्य निधि की

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इच्छापूर्ति

क्या गुरु/भगवान सामर्थ्यवान नहीं है ? माचिस उसी दीपक को जला सकती है, जिसमें तेल हो/जलने की योग्यता  हो । मुनि श्री सुधासागर जी

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मंगल आशीष

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