Category: डायरी

पापी का कर्मफल

वर्तमान का पापी यदि वैभव संपन्न है तो पूर्व के पुण्य से, पर वर्तमान के पाप उसे आकुलता, बदनामी तथा भविष्य की दुर्गति का कारण

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पुण्य/पाप

पुण्य हो तो तिनके का सहारा भी तार देता है , पापोदय में जहाज़ भी डुबा देता है ।

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ज्ञानी / अज्ञानी

अज्ञानी व्यक्ति ग़लती छिपाकर बड़ा बनना चाहता है, औऱ ज्ञानी व्यक्ति ग़लती मिटाकर बड़ा बनना चाहता है । (सुरेश)

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याददाश्त

हमें धर्म की बातें याद क्यों नहीं रहतीं ? याद वही बातें रहती हैं… जिनके प्रति आकर्षण और रूचि होती है या जिनको कर्तव्य की

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सानिध्य

प्रत्यक्ष संपर्क ही ज़रूरी नहीं है, वरना भगवान और भक्त के बीच, संबंधों का महत्त्व ही समाप्त हो जाएगा । रामायण

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ग़रीबी

किसी ने क्या ख़ूब कहा है… ऐ मौत ! जरा पहले आना, ग़रीब के घर; कफ़न का खर्च, दवाओं में न निकल जाए…! (डा.अमित राजा)

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मंगल आशीष

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