Category: डायरी
अपेक्षा से दु:ख
October 5, 2016
एक मटका और गुलदस्ता साथ में खरीदा हो और घर में लाने के 3 दिन बाद 50 रुपये का मटका अगर फूट जाए तो हमें
कड़वी बातें
October 4, 2016
कड़वी गोलियाँ चबाई नहीं, निगली जाती हैं । उसी प्रकार जीवन में अपमान,असफलता ,धोखे जैसी कड़वी बातों को सीधे गिटक जाऐं… उन्हें चबाते रहेंगे यानि
शरीर / आत्मा
September 29, 2016
एक शिष्य ने अपने गुरूजी से पूछा – ” नष्ट होने वाले इस शरीर में, नष्ट ना होने वाली आत्मा कैसे रहती है ? ”
एकमत
September 28, 2016
एक दिशा में चार रिश्तेदार, चार कदम तब ही चलते हैं , जब पांचवा कंधे पर हो… (नीलांजना)
फ़र्क पड़ता है
September 27, 2016
एक बार समुद्री तूफ़ान के बाद लाखों मछलियाँ किनारे पर तड़प तड़प कर मर रहीँ थीं ! एक बच्चे से रहा नहीं गया, और वह
कश्मीर
September 26, 2016
फिर उड़ गयी नींद ये सोच कर,,, सरहद पर बहा वो खून मेरी नींद के लिये था…! 2) उम्र जन्नत में रह कर, उसे उजाड़ने
वक्त
September 25, 2016
“वक़्त” हर “वक़्त” को “बदल” देता है, सिर्फ, “वक़्त” को थोड़ा “वक़्त” दो !
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