Category: डायरी
घड़ी
April 3, 2016
घड़ी की टिक-टिक को मामूली न समझो ! बस यूँ समझ लीजिये… ” ज़िंदगी ” के पेड़ पर ये समय रूपी कुल्हाड़ी के वार हैं
प्रयास
April 2, 2016
बारिश की बूँदें, भले ही छोटी हों, लेकिन उनका लगातार बरसना बड़ी बड़ी नदियों का बहाव बन जाता है. ऎसे ही हमारे छोटे छोटे और
पूजा / सेवा
March 31, 2016
पूजा श्रद्धा का विषय है, सेवा संवेदना का । श्रद्धा के साथ संवेदना और प्रबल व श्रेष्ठ हो जाती है ।
सम्पदा
March 29, 2016
सम से सम्पदा बना, यानि अपने और दूसरों के माध्यम से अर्जित की जाती है । अत: इसका उपयोग भी दोनों के लिये होना चाहिये
चिंतन
March 28, 2016
किस रूप का चिंतन करें ? अपने उस रूप का, जो तुम किसी के सामने प्रस्तुत नहीं करते हो/बिना मुखौटे वाला ।
विड़म्बना
March 25, 2016
इंसान भी कैसा अजीव है …! जीते समय सोचता है कि कभी मरुँगा नहीं, मरते समय लगता है जैसे कभी जीया ही नहीं । (सुरेश)
होली
March 23, 2016
1) हो-ली…जो बीत गयी सो बात गयी। 2) हो-ली…मैं धर्म की हो-ली। 3) Holy…Purity. (Neelam)
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