Category: वचनामृत – अन्य

चमत्कार

एक गांव वाला शहर आया, अंधेरा होने पर उसने दिया और माचिस मांगी, बटन दबाकर बल्ब जला दिया गया । वह बोला – क्या चमत्कार

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पुरूषार्थ

आजकल पुरूषार्थ व्यायाम करने वाली साइकिल जैसा है , चलाते चलाते, पसीना पसीना हो जाते हैं पर पहुंचते कहीं नहीं । मुनि श्री सौरभसागर जी

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कल्पना

कल्पना अस्थिरता देती है । बिना पैर का पक्षी है, उड़ता तो बहुत है पर उतरता कहीं नहीं है । मुनि श्री सौरभसागर जी

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क्षमावाणी पर्व

क्षमा अंत:करण की उदारता है । क्षमा सामाजिक और पारिवारिक तौर पर तो बहुत मांगी जाती है, पर असली तो आत्मिक और आंतरिक है ।

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उत्तम ब्रम्हचर्य

पांचों इंद्रियों के विषयों से विरक्त होने का नाम ही उत्तम ब्रम्हचर्य है । आचार्य श्री विद्यासागर जी मस्तिष्क माचिस की डिब्बी है, घिसने से

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उत्तम आकिंचन्य

पैदा होते समय हर व्यक्ति दिगम्बर ही होता है, बाद में वह पीताम्बर, नीलाम्बर आदि बन जाता है, मरते समय भी दिगम्बर ही जाता है,

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उत्तम त्याग

कोई और छुड़ाये उससे पहले खुद छोड़ना त्याग है, न छोड़ना मौत (न छोड़ने पर मौत तो सब कुछ छुड़ा ही लेगी) घर वाले निकालें,

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उत्तम त्याग

दानी का सम्मान होता है, त्यागी पूजा जाता है, दान में बदले का भाव होता है, त्याग में नहीं, दान ऊपर से होता है जैसे

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उत्तम तप

कल के संयम धर्म में इच्छाओं को कम करने का प्रयास था, आज के धर्म में इच्छाओं का पूर्ण निरोध करना है । संयम में

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उत्तम संयम

सत्य धर्म की सजावट संयम से ही है । शराबखाने में बैठकर दूध पीने वाला भी बदनाम होता है । एक मकान में आग लग

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मंगल आशीष

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