Category: वचनामृत – अन्य

क्रोध

1. तामसिक – दूसरों को सताने – मरणांतक 2. राजसिक – अहंकार पुष्टि – दीर्घकाल 3. सात्विक – दूसरों की भलाई के लिये – अल्पकाल

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नुकसान

हर नुकसान, नुकसान करके ही नहीं जाता, फायदा भी कर जाता है जैसे सिर में चोट लगने पर खून निकलना। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी

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नकल

पं. बनारसीदास जी मुनियों की नकल करके 3 दिन तक कमरे में अकेले ध्यान करते रहे (गृहस्थों के आवश्यक कर्त्तव्य छोड़कर ) इस अनुभव को

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पाप बंध पर नियंत्रण

1. चुनाव लड़ना नहीं है लेकिन कौन जीते/हारे, इसे लेकर आपस में लड़ाई क्यों ? क्या  इससे पापबंध नहीं होगा ! 2. जानवरों को मारना

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संस्कार

मशीन से कपड़ा Defective निकल रहा है, तो सुधारोगे मशीन को या कपड़े को? सुधारना तो बिगाड़ने वाले को ही चाहिये। बच्चों को संस्कार पति/पत्नि

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अभिमान

बड़े लोगों में प्राय: अभिमान देखा जाता है, फिर भी उनका वैभव/नाम कम क्यों नहीं होता ? एक बार बड़ी कमाई (पुण्य) कर लेने पर

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भक्त / भगवान

भगवान, धर्म गुरु, शास्त्र, कुल, जाति, देश सब सच्चे चाहिये, भक्त (मैं)? कुंडली तो दोनों की समान होनी चाहिये न! मुनि श्री सुधासागर जी

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पुण्यहीन का महत्व

पार्श्वनाथ भगवान पर जब उपसर्ग हुआ तो उन पर छत्र लगाने सबसे पुण्यहीन आये, जो पिछले जन्म में सांप थे (सांप इतना पुण्यहीन होता है

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संसार / मोक्षमार्ग

संसार-मार्ग पर टिक नहीं सकते, पर टिकना चाहते हो ! मोक्ष-मार्ग पर टिक सकते हैं, पर टिकना नहीं चाहते हो !! मुनि श्री महासागर जी

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गुरु दर्शन

जिन-जिन वस्तुओं/ सुविधाओं की कमी में श्रावक दु:खी होता है, गुरु उन-उन के अभाव में सुखी रहकर दिखाता है । मुनि श्री सुधासागर जी

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मंगल आशीष

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