Category: वचनामृत – अन्य
क्षमा
क्षमा कैसे करें ? बस क्षमा करके/बैर छोड़कर, उनसे भी जिनको पता ही नहीं कि तुम उनसे बैर करते हो । मुनि श्री अविचलसागर जी
मत/मन भेद
मन भेद में कषाय (क्रोध, मानादि) है, मत भेद में नहीं । मुनि श्री सुधासागर जी
अधूरा ज्ञान
थोड़ी वर्षा कीचड़ करती है, पूरी वर्षा सफ़़ाई । मुनि श्री अविचलसागर जी
गुरु-लाभ
4 Steps से पूर्ण गुरु-लाभ लिया जा सकता है – 1. Near 2. Hear 3. Tear 4. Fear (आदर) मुनि श्री प्रमाणसागर जी
कर्म काटना
कर्म काटने का सरलतम उपाय – पापोदय के समय अपने कुकृतों को स्वीकारो/ प्रायश्चित लो/ आगे पुनरावृत्ति न करने का संकल्प लो । देखा भी
शब्द / भाव
सेठ की कोठी के पास ही गरीब की झोंपडी थी । गरीब लडके की माँ मरी तो उसके लड़के ने अपने शब्दों में दुःख ज़ाहिर किया
विषय-भोग
सिनेमा देखते हुये एक व्यक्ति मूंगफली खा खा कर छिलके बगल वाले की जेब में डालता जा रहा था । दूसरी तरफ बैठे मित्र ने
क्रोध
कार का इंजन, फेल/बंद होने के काफी देर पहले से गर्म होना शुरु हो जाता है । यदि समय रहते पानी डाल कर ठंडा कर
कर्म-सिद्दांत
जैसे ऊँट की चोरी छुपती नहीं है, वैसे ही कर्म-फल को भी छुपा नहीं सकते । मुनि श्री महासागर जी
अनुभव / अनुभूति
अनुभव दूसरों का भी होता है(काम स्वयं के भी आता है) जैसे ज़हर से दूसरों को मरते देखकर होता है । अनुभूति स्वयं की ही
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