Category: वचनामृत – अन्य

अवनति

अच्छी अच्छी नस्लें समाप्त हो रहीं हैं, पर नये नये वायरस पैदा हो रहे हैं । यह दर्शाता है कि हम अवनति की ओर अग्रसर

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लेन-देन

अति उपकारी फलदार वृक्ष को भी पहले खाद पानी/सेवा करने पर ही उनसे फल प्राप्त होते हैं । मुनि श्री सुधासागर जी

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दान

धन और समय का ही दान नहीं होता बल्कि पांचों इन्द्रिय के विषयों का भी होता है, जैसे 1 घंटे को सिर्फ भगवान को ही

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मायाचार / श्रद्धा

गुरु की सुनते हैं, मानते नहीं हैं तो क्या यह मायाचारी है ? नहीं लाचारी है । साधारण शिष्य श्रद्धालु होते हैं, अनुयायी नहीं ।

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उत्तराधिकारी

लड़कियों को आगमानुसार पिता की सम्पत्ति पर बराबर का अधिकार होता है । मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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घमंड

हर छत, ऊपर मंज़िल बनने पर फर्श बन जाती है । छत को घमंड ना आये, ऐसा क्या करें ? यश-बड़वानी हर उपलब्धि को छत

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संकल्प / विकल्प

खेती का संकल्प लेते ही विकल्प शुरू हो जाते हैं, याने खतपतवार पहले तथा साथ-साथ उगता रहता है । किसान को समय-समय पर साफ सफाई

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जैन दर्शन

अन्य दर्शनों की तरह, जैन दर्शन का एक शास्त्र क्यों नहीं ? अन्य दर्शनों में भगवान अकेला कर्ता होता है, जैन दर्शन में हर जीव

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मान

मान इतना बुरा नहीं है, जितना दूसरों का अपमान करना । दूसरों का सम्मान न करें चलेगा, अपने सम्मान की आकांक्षा ना रखें । मुनि

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धार्मिक-क्रियायें

शरीर पर मैल लगने पर मक्खियाँ भिनकने लगती हैं, मैल साफ करने पर ही हटती हैं । विकार रूपी मैल आत्मा पर लगने पर समाज

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मंगल आशीष

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