Category: डायरी

उत्तम शौच

शौच = पवित्रता/ लोभ न करना लोभ दो प्रकार का… 1) नैतिक – कुल/ समाज/ राष्ट्र/ धर्म के नियमानुसार; गृहस्थों के लिए निषेध नहीं ।

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उत्तम आर्जव

आर्जव = मायाचारी का उल्टा/ सरलता ■ सरलता देखनी/सीखनी है तो छोटे बच्चों से सीखें । • सरल होने के लिए, लोहे की छड़ की

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उत्तम मार्दव

मान का न होना । मद = मान का नशा । मद 8 चीजों का— जाति, कुल, ज्ञान, बल, रूप, तप, पूजा, ऋद्धि । मद

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उत्तम क्षमा

■ क्षमा से बैर नहीं रखना । आचार्य श्री विद्यासागर जी ■■ क्षमा कैसे करें ? बस क्षमा करके, क्षमा करें / बैर छोड़ दें,

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पर्यूषण

????????महापर्व पर्युषण???????? नहीं उपवास कर पाओ, तो तुम उपहास से बचना। अगर दर्शन न हो संभव, प्रदर्शन से ही तुम बचना। कमी वंदन में रह

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शनि / मनी

शनि से मन को, मनी से दिमाग को कैसे बचायें ? काले (शनि का), पीले (सोना) कामों से बचें ।

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विश्वास

डॉक्टर के पर्चे को ना समझें/समझ आयेगा भी नहीं, डॉक्टर को समझो/डॉक्टर पर विश्वास करो । गुरु/भगवान की बातें तो कम ही समझ पाओगे सो

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धर्म

किसी ने कहा – “बचपन में बुढ़िया मर गयी”, यानि ! मरने से कुछ साल पहले उसने धर्म में प्रवेश किया था । सावधान !!

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शून्य

शून्य का कोण 360 ड़िग्री यानि पूर्ण/पूर्णता का प्रतीक । इसे हीन (Zero) दृष्टि से ना देखें । व्यवहार में भी यह शून्य जिस अंक

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मंगल आशीष

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