Category: डायरी

अधूरी-ज़िन्दगी

कभी हँसते हुए छोड़ देती है, ये ज़िंदगी; कभी रोते हुए छोड़ देती है, ये ज़िंदगी । न पूर्ण-विराम सुख में, न पूर्ण-विराम दुःख में,

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आनंद

ज़िन्दगी का आनंद अपने तरीके से ही लेना चाहिए, लोगों की खुशी के चक्कर में तो शेर को भी सर्कस में नाचना पड़ता है। (श्रीमति

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प्रतिष्ठा

चरित्र वृक्ष के समान है, लेकिन प्रतिष्ठा उसकी छाया* है.. ???? मंजू ???? * पापोदय से यदि बादल छा जांय तो छाया नहीं पड़ेगी, लेकिन

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बड़ा आदमी

मत बन बड़ा आदमी, छोटेपन का मज़ा अनूठा होता है ! समंदर में मिलने से पहले तक ही, हर नदी का पानी मीठा होता है

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शब्द / अर्थ

हमेशा हर किसी की बातों का अर्थ मत खोजना, शब्दों और मायनों में अक्सर अनबन रहती है ! (डॉ.पी.एन.जैन)

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रुतवा

गर्मी जाने लगी और कानों में इतना कह गयी कि.. गर्मी किसी की भी हमेशा के लिए नहीं रहती । (सुरेश)

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खिचड़ी

???????????????????????????? खिचड़ी यदि बर्तन में पके तो बीमार को ठीक कर देती है, और यदि दिमाग में पके तो इंसान को बीमार कर देती है

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संगति

मोहर में अक्षर उल्टे लिखे होते हैं (हमारे संस्कार), पर स्याही की (सु)संगति पाकर उसकी छाप सीधी आती है । (डॉ.पी.एन.जैन)

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मंगल आशीष

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