Category: डायरी
भगवान / गुरु
भगवान/गुरु, वे नहीं जो भक्तों से राग करते हों, बल्कि वे जो दुश्मनों से द्वेष ना करते हों ।
चमत्कार
जल भगवान पर ड़ाला जाता है, शीतलता भक्त को, विकार भक्त के धुलते हैं ।
शुद्धि
जिसका अर्थ शुद्ध, वही सच्चे अर्थों में शुद्ध । (अर्थ = जो प्रत्यक्ष के पीछे छुपा रहता है/ अभिप्राय/ intention)
अहिंसा
गाँधी जी की लाठी मारने के लिये नहीं थी, बल्कि मार खाने पर उठने के लिये थी ।
अभिमान
हैसियत का कभी अभिमान न करना, उड़ान ज़मीं से शुरू और ज़मीं पै ही खत्म होती है । (सुरेश)
ख्व़ाहिशें
ख्व़ाहिशों का राजपथ बहुत बड़ा और भीड़-भाड़ वाला होता है, बेहतर यही है की हम, ज़रूरतों की छोटी-छोटी गलीयों में मुड़ जाएँ ! ???????? नीलम
दान
यदि आप के चंद मीठे बोलों से किसी का रक्त बढ़ता है तो यह भी रक्त-दान है, यदि आप के द्वारा किसी की पीठ थपथपाने
रिश्ते
उलझे जो कभी मुझसे तो, आप सुलझा लेना; रिश्ते का एक सिरा, आपके हाथों में भी तो है.. ???????? सुरेश ????????
क्रोध
क्रोध आपका ऐसा हुनर है… जिसमें फंसते भी आप हैं, उलझते भी आप हैं, पछताते भी आप हैं और पिछड़ते भी आप हैं। (शैलेन्द्र)
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