Category: डायरी
इच्छा / अपेक्षा
इच्छाओं के निरोध का पहला कदम है – दूसरों से अपेक्षा कम करते हुए, समाप्त करना । सरल को पहले tackle करना/गरम खिचड़ी के बाहर
कष्ट / इष्ट
मोक्षमार्ग कष्टप्रद ? इष्ट पर द्रष्टि हो तो कष्ट कैसा ! जैसे तिल से तेल निकालना, पाषाण से स्वर्ण आदि ।
ग्रहों का प्रभाव
ग्रह/नक्षत्र ऊर्जा पिंड़ हैं । इनकी गति से वातावरण के अवयवों की Chemistry बदलती रहती है । हमारे शरीर में भी वे ही अवयव हैं,
साम्प्रदायिकता
धर्म/संप्रदाय तो अलग अलग होंगे ही, क्योंकि विश्वास/संस्कार सबके अलग अलग होते हैं, उनको ऊपर उठाने में आपत्ति नहीं । पर दूसरे धर्मों को गिराना
वास्तु
वास्तु का प्रभाव पुण्य के उदय में नगण्य हो जाता है । वास्तु-शुद्धी से, वास्तविक-शुद्धी(कर्मों की) बेहतर/ज़्यादा असरकारक होती है ।
धर्म / शारीरिक कष्ट
क्या शरीर को कष्ट देकर धर्म करना सही है ? नहीं, धर्म से तो शारीरिक कष्ट सहने की शक्ति आती है । उस शक्ति को
उत्साह
जो अपने कार्य/कर्तव्य में डूब जाता है, वह उस कार्य/कर्तव्य से कभी ऊबता नहीं है । धर्म के क्षेत्र में तो नित नए आनंद का
ब्याज
एक समुदाय में ब्याज लेना गुनाह है, तो बाकीयों को लेना चाहिए ? शोषण (सामान्य से ज़्यादा नहीं) नहीं, पोषण (जिसमें दोनों पक्षों का भला
कातिल
ज़हर तो ना दिया, उसने अपने माँ बाप को… लेकिन वक़्त पर दवा भी ना दी….. (धर्मेंद्र)
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