Category: डायरी

अपेक्षा से दु:ख

एक मटका और गुलदस्ता साथ में खरीदा हो और घर में लाने के 3 दिन बाद 50 रुपये का मटका अगर फूट जाए तो हमें

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कड़वी बातें

कड़वी गोलियाँ चबाई नहीं, निगली जाती हैं । उसी प्रकार जीवन में अपमान,असफलता ,धोखे जैसी कड़वी बातों को सीधे गिटक जाऐं… उन्हें चबाते रहेंगे यानि

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शरीर / आत्मा

एक शिष्य ने अपने गुरूजी से पूछा – ” नष्ट होने वाले इस शरीर में, नष्ट ना होने वाली आत्मा कैसे रहती है ? ”

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एकमत

एक दिशा में चार रिश्तेदार, चार कदम तब ही चलते हैं , जब पांचवा कंधे पर हो… (नीलांजना)

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फ़र्क पड़ता है

एक बार समुद्री तूफ़ान के बाद लाखों मछलियाँ किनारे पर तड़प तड़प कर मर रहीँ थीं ! एक बच्चे से रहा नहीं गया, और वह

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कश्मीर

फिर उड़ गयी नींद ये सोच कर,,, सरहद पर बहा वो खून मेरी नींद के लिये था…! 2) उम्र जन्नत में रह कर, उसे उजाड़ने

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वक्त

“वक़्त” हर “वक़्त” को “बदल” देता है, सिर्फ, “वक़्त” को थोड़ा “वक़्त” दो !

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मंगल आशीष

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