Category: डायरी
उम्मीद
उम्मीदों से बंधा एक ज़िद्दी परिंदा है इनसान , जो घायल भी उम्मीदों से है, और ज़िंदा भी उम्मीदों पर है । (मंजू)
दुनिया
हरिवंशराय बच्चन जी की एक ख़ूबसूरत कविता, “रब” ने नवाज़ा हमें ज़िंदगी देकर, और हम “शौहरत” माँगते रह गये । ज़िंदगी गुज़ार दी शौहरत के पीछे, फिर जीने की
धन / धर्म
व्यक्ति की चाल…… धन से भी बदलती है, और धर्म से भी ! जब धन संपन्न होता है, तब अकड़ कर चलता है; और जब
प्रभु दर्शन
आईना साफ़ किया तो “मैं” नज़र आया, “मैं” को साफ़ किया तो “तू” नज़र आया । (नीलम)
भगवान
गरीबों के बच्चे भी खाना खा सकें त्यौहारों में, इसलिये भगवान खुद बिक जाते हैं बाज़ारों में । (ब्र.नीलेश भय्या)
क्षमा दिवस
भगवान, गुरु, शास्त्रों से; माँ और बड़ों से, उनके बताये हुए मार्ग पर न चल पाने के लिये; अपने आप से, जीवन सही तरीके से
आकिंचन्य धर्म
“यह मेरा है” ऐसे भाव का त्याग करना ही आकिंचन्य धर्म है । 2) मछली पानी के बाहर आने पर मरने का एक कारण आक्सीजन
त्याग धर्म
मोह को छोड़कर संसार, देह और भोगों से उदासीन परिणाम रखना त्याग धर्म है । बारसाणुवेक्खा-78 2) दान और त्याग में अंतर – * दान
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