Category: डायरी
बचपन
April 22, 2015
बच्चा बड़ा कब से माना जाये ? जब से उसके अंदर ग्रंथियाँ पड़ने लगें, अपने पराये की ।
अहंकार
April 17, 2015
धर्म का भी अहंकार होता है , और उसका नाम है अधर्म , तो अधर्म का अहंकार कितना भयानक होगा !!
सुख/संतोष
April 16, 2015
सुख की चाहना द्वंद पैदा करती है, संतोष की चाहना शांति । (श्रीमती दीपा)
सत्य
April 15, 2015
प्रियजन तो हमारे बारे में झूठ ही बोला करते हैं । सत्य तो सिर्फ दुश्मन ही बोल सकता है ।
हंसी
April 13, 2015
जो दूसरों पर हंसता है, वह मूर्ख है, जो अपने पर हंसता है, वह समझदार है, जो दु:ख में हंसता है, वह संत है ।
भाग्य
April 11, 2015
कर्म, भाग्य, पुरुषार्थ – ये सब पर्यायवाची हैं । (श्रीमति महेन्द्री)
पूजा/ध्यान/स्वाध्याय
April 10, 2015
पूजा – बोलकर ध्यान – बिना बोले स्वाध्याय – सामूहिक पाठशाला
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