Category: डायरी

प्रसन्नता

आज सब अपनों में संलग्न, अपनों को प्रसन्न करने में लगे रहते हैं। अपने को/ अपने लिए कुछ नहीं। माँ बच्चों की प्रसन्नता में ही

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सफलता का रहस्य

अमेरिका के बड़े धनी एंड्रयू कार्नेगी ने सफलता का रहस्य वबताया… सोने की खदानों में टनों मिट्टी हटाने/Ignore करने पर एक/दो ग्राम सोना नज़र आता

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पैसा

जैसे-जैसे पैसा बढ़ता जाता है, शून्यता भी बढ़ती जाती है(1, 10, 100…..)। इसीलिए बुजुर्गों ने 11-101 आदि की भेंट शुरू करी ताकि एकता(1) बढ़े। गौरव

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आत्मविश्वास

“छाता” बारिश तो नहीं रोक सकता, पर “बारिश” में खड़े होने का “साहस” ज़रूर देता है। ठीक उसी तरह “आत्मविश्वास,”सफलता” की गारंटी तो नहीं देता,

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सुखी

सबसे करीब हमारी आत्मा, लेकिन करीब रहते हैं दूसरों की आत्मा के। “स्व” के ऊपर श्रद्धालु ही “पर” श्रद्धालु हो सकता है। जो ख़ुद सुखी

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अस्तित्व

दीवारों ने छत से कहा…तुम हम पर ही टिकी हो। छत ने कहा… तुम्हारी सुरक्षा मुझसे ही है। फर्श चुप ना रह सका बोला… मेरे

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माँ

दीपक (माँ रूप) पूरे घर को प्रकाशित करता है, पर दिया तले अंधेरा (माँ अपना ध्यान नहीं रखतीं)। उस अंधकार को दूसरे दीपक दूर कर

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परिवार

परिवार…. परि = चारों ओर से। वार = 1. आघात/ चोट पहुँचाना। 2. अवसर/ चोटी पर पहुँचाना। हम कैसा परिवार विकसित कर रहे हैं !

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मंगल आशीष

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