Category: डायरी

ज्ञान

आचार्य श्री विद्यासागर जी के गुरु, आचार्य श्री ज्ञान सागर जी कहा करते थे… ज्ञान व्यक्ति की शोभा बढ़ाता है, यदि चरित्र के साथ हो

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जीव दया

राजस्थान में 3 साल से सूखा पड़ रहा था। आचार्य श्री विद्यासागर जी ने 1008 गायों को जैसलमेर से ट्रेन द्वारा अमरकंटक बुलवाया, जहाँ आचार्य

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दूर के ढोल सुहावने

ऊपर से तो गंदा नाला भी सुंदर दिखता है, पास आने पर दुर्गंध/ गंदा; अंदर उतरने पर स्विमिंग पूल में भी घुटन होने लगती है।

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नियंत्रण

प्राय: व्यक्ति अपने से छोटे, बड़े तथा खराब सभी को नियंत्रित करना चाहता है लेकिन अपने को नहीं। किसी को सुधारना है तो पहले अपने

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सीमा

सीमा के बाहर की उपलब्धि दुःखदायी बन जाती है। जैसे सर्दियों में ऊँचे पहाड़ पर चढ़ते समय गर्म कपड़े। अति सफाई के लिये बार-बार झाडू

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सीख

मेडिकल विद्यार्थियों को शरीर रचना सिखाते समय डॉक्टर ने मुर्दे की नाक में उंगली डाली और चूसने लगा। पहली सीख – घृणा नहीं करना। तुम

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हर्र

हर्र एक बहुत गुणवान देसी औषधि है। अलग-अलग मौसमों में अलग-अलग चीजों के साथ प्रयोग करना चाहिए जैसे… 1) वर्षा ऋतु: श्रावण और भाद्रपद माह

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आयुर्वेद

आयुर्वेद पद्धति में मरीज को निर्भीक बनाया जाता है। एलोपैथी में डर दिखाया जाता है। मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 16 जून)

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मंगल आशीष

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