Category: डायरी
मिठास
शक्कर तो सबके कपों में होती है, कुछ उसे घोल लेते हैं (जीवन में), कुछ ज़िंदगी भर फीकी चाय ही पीते रहते हैं, शक्कर बची
भाव
भाव सहित बिना माला (उँगलियों पर) के भी मालामाल हो सकते हैं । भाव रहित सोने की माला फेरने से भी सूने रह सकते हैं
सुपात्र / कुपात्र
गाय को पानी/दाना दो, तो दूध मिलता है । साँप को दूध पिलाओ, तो ज़हर मिलता है ।
एहसास
नीचे से ऊपर (वालों साधु आदि) का अनुमान गलत ही होगा, ऊपर से नीचे देखने पर तो चक्कर आ जाते हैं । सही एहसास/अनुमान समान
शाकाहार
आम आदमी को मांसाहार में हिंसा के बारे में कम, शाकाहार के फायदे, शरीर की निरोगता, भावों पर असर/संवेदनशीलता के बारे में ज़्यादा समझाऐं ।
ख़राब समय
“समय” जब नाच नचाता है ना साहिब ! तब सारे सगे-संबंधी काेरियाेग्राफर बन जाते हैं !! (डॉ.अमित राजा)
ग़लतफ़हमी
ग़लतफ़हमियों के सिलसिले इतने दिलचस्प हैं….. हर ईंट सोचती है, दीवार मुझ पर टिकी है…..!! (सुरेश)
ख़्वाहिश
ज़िंदगी में सारा झगड़ा ही ख़्वाहिशों का है, ना तो किसी को ग़म चाहिए…. और ना ही किसी को कम….। (धर्मेंद्र)
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