Category: डायरी

भाषा समिति

अंग्रेजों की अन्यायपूर्ण सत्ता के बारे में एक पुस्तक लिखी गई, नाम था “सोने की चिड़िया और लुटेरे अंग्रेज”। आचार्य श्री विद्यासागर जी उस पुस्तक

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असाढ़ माह के प्रभाव

आषाढ़ के माह में (जो आजकल चल रहा है) नमी बहुत होती है, त्वचा के रोमों से वायु के साथ* नमी अंदर भी चली जाती

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वैराग्य

कहा है कि संसार को देखकर वैराग्य होता है पर हमको हो क्यों नहीं रहा ? क्योंकि हम संसार में रूप देखते हैं जिससे राग

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कषाय

क्रोध प्रीति को नष्ट करता है। मान, विनय को। माया, मैत्री, लोभ, सर्व विनाशक है। क्षुल्लक श्री जिनेंद्रवर्णी जी (शांतिपथ प्रदर्शक)

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अनर्थ फल

प्रश्न: पाप का अनर्थफल क्या है ? उत्तर: मन का अस्तव्यस्त/अशांत होना। -आचार्य श्री अमोघवर्ष कृत प्रश्नोत्तर-रत्नमाला (गाथा सं 15) यह पाप का प्रत्यक्ष/तुरंत मिलने

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समाधिमरण

समाधिमरण के समय संबोधन कम करना चाहिए। शरीर शिथिल हो रहा होता है, अधिक संबोधन अतिभारारोपण हो जाएगा और उसके भाव ख़राब हो सकते हैं।

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मंगल आशीष

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