Category: डायरी
रिश्ते
जैसे जैसे पैसा बढ़ता जाता है शून्यता बढ़ती जाती है –> 10, 100, 1000….। इसलिये बुजुर्गों ने 11, 101, 1001, देने का रिवाज बनाता था।
Lack of confidence
Lack of confidence के कारण ? हो पायेगा (भविष्य का भय) ! या हो गया था (भूत के दुखद अनुभव) यही हमारी गाथा है, आत्मविश्वास
निरीहता
आचार्य श्री विद्यासागर जी से किसी गृहस्थ ने कहा… हम तो श्रावक हैं, आपके दर्शन करते समय भी कुछ अपेक्षाएं रखते हैं। पर आपकी निरीहता
ज्ञान
अज्ञानी बच्चे हाथी के आगे-आगे चलते हैं (हाथी जो ज्ञान का प्रतीक है और अज्ञानी बच्चे मान के)। वही बच्चे पागल के पीछे-पीछे ताकि उसे
सत्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी कहा करते थे… झूठ यदि सफ़ेद हो सकता है तो सत्य को कड़वा कहने में क्या दुविधा ! पर सत्य होता
आदमियत
एक आदमी था। राजा बनते ही आदमी मर गया, राजा जीता रहा। ब्र. डॉ. नीलेश भैया
कर्म / धर्म
कर्म करना ज्यादा महत्वपूर्ण या धर्म करना ? क्या धर्म कर्म नहीं ? क्या कर्म धर्ममय नहीं हो सकता ? कितना, कब, क्यों और कौन
अंतराय
आचार्य श्री विद्यासागर जी से प्रश्न किया कितने लोग मुनिराजों के चतुर्मास के लिए प्रयास करते हैं, पहले से घोषणा कर दी जाए तो उनके
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