Category: डायरी
सुख
सांसारिक सुख की तासीर – 1. समय/मात्रा/संख्या के साथ घटता है । 2. सुख देने वाली वस्तु से अलगाव अवश्यंभावी होता है । 3. सुख
मनोबल
मनोबल बढ़ाने के लिये – 1. रूढ़ियों से हटना होगा 2. दृष्टि को सच्चे रास्ते (देव, शास्त्र, गुरू) पर बनाये रखना 3. स्वाध्याय 4. सुसंगति
उल्टी बुद्धि
ऐसी बुद्धि वाले Valley की Shape को ही पहाड़ मानने लगते हैं (Shape तो”V” की ही है, उल्टी ही सही )
सदुपयोग / दुरुपयोग
समय पर किया गया कार्य – सदुपयोग समय निकल जाने के बाद किया गया कार्य – दुरुपयोग
Present
The PAST,the PRESENT and the FUTURE are really one: they are TODAY
देह-त्याग
माँ (श्रीमती मालतीदेवी) के देहावसान पर…. वेदन हो पर वेदना न हो,उसे निर्जरा (कर्मों को काटना) कहते हैं । लालमणी भाई
रुद्र / नारद
महापुरुषों में इनकी गिनती हुंड़ा की देन है । आ. श्री विद्यासागर जी – दिव्योपदेश
पाप / अपराध
पाप – आंतरिक, अधर्म तथा भावनाओं से, अपराध – प्रकट, क्षेत्र और काल से परिभाषा बदलती रहती है, इसका फल बाद में निर्धारित किया जाता
ज्ञानी
ज्ञानी की हर क्रिया में ज्ञान झलकता है – बोलने, चलने, देखने, सुनने में, चाहे परिस्थिति अनुकूल हो या प्रतिकूल, चाहे वस्तु अच्छी हो या
ज़िंदगी
ज़िदगी के नियम भी कुछ कबड्डी के खेल जैसे हैं । सफलता की लाइन टच करते ही, लोग आपके पैर खींचने लग जाते हैं ।
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