Category: डायरी

साथ

साँस के साथ, अकेला चल रहा था.. साँस गई, तो सब साथ चल रहे थे । (डॉ.अमित)

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संगति

चलो बहाव में नदियों के, ताकि वे मंज़िल तक पहुँचा दें; लेकिन बहक न जाना बहाव में, इन हवाओं के, कि वे अपने लक्ष्य से

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Contentment

The crow and the parrot were both created ugly. The parrot protested and was made beautiful. However, the crow remained content with the will of

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माता पिता

अपना संपूर्ण जीवन देकर ‘पानी’ वृक्ष को बड़ा करता है…, इसलिए शायद “पानी” लकड़ी को कभी डूबने नहीं देती.. माता पिता की भी यही भूमिका है हमारे

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संगति

जैसे संगति और संयम शब्दों में एकरूपता दिखती है, ऐसे ही संयम निभाने में भी संगति का बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान है।

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इनसान

राह में पड़े पत्थर से भी टकरा जाओ, तो उससे क्षमा माँग लेना, पत्थर तो कुछ नहीं बोलेगा, पर तुम इनसान होने का परिचय ज़रूर

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असूल और ख़्वाब

चादर से पैर तभी बाहर आते हैं, जब “असूलों” से बड़े “ख़्वाब” हो जाते हैं । (ललित)

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प्रगति

हमारी प्रगति क्यों नहीं हो रही ? हममें अवगुण ही नहीं, गुण भी एक से एक अच्छे हैं/पूर्व में रहे भी हैं; पर हम उनकी

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करुणा / दया

करुणा बिना किसी निमित्त के भी आती है, जैसे “सुखी रहे सब जीव जगत के…” । दया निमित्त से, दीन दु:खी को देखकर ।

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मंगल आशीष

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