Category: डायरी
व्यसन
व्यसन (चोरी भी व्यसन है, हालांकि इसे पांच पापों में गिना जाता है) त्याग में दक्ष कौन ? सर्वथा त्यागी, यानी मुमुक्षु (मोक्ष सिर्फ चाहता
आयु
पूर्व से लेकर आयी हुई आयु को क्या हम बढ़ा सकते हैं? नहीं, किंतु घटा जरूर सकते हैं, जैसे तिजोरी में रखा धन बढ़
समता
सूर्य ही एक ऐसा नक्षत्र है जिसकी सुबह और शाम की लालिमा एक सी होती है/ उन्नति और अवनति के समय समता भाव। प्रकाश और
अहंकार
अहंकार— व्यक्ति कितना भी गोरा हो, छाया उसकी भी काली ही होती है। (मंजू रानीवाला)
मत/मन भिन्नता
शेर ने सब जानवरों से अपना चित्र बनवाया। जिराफ़ के चित्र में शेर की पीठ थी। अन्य जानवरों के चित्र भी दायें, बायें, आगे, पीछे
कषाय
तीन दिन तक यदि किसी ने पानी भी ना पिया हो पर मिठाई का नाम लेते ही मुँह में पानी पानी हो जाता है। तो
परमात्मा
कारण परमात्मा…. बीज/ संसार/ बिंदु। इसलिये संसार भी आदरणीय, यहाँ तक पेड़ादि भी क्योंकि वे मनुष्य की वंशवृद्धि में सहायक हैं। इसके लिये उदार चित्त
संकल्प
बोतलें भर भर कर रक्तदान करते हैं, उसमें तकलीफ महसूस नहीं करते लेकिन मच्छर अगर एक बूँद खून ले जाए तो बिलबिला जाते हैं। कारण
रोग और निदान
रोग पैदा तो होता है मन में, पनपता है शरीर में। जिस क्षेत्र में रोग होता है, निदान भी उसी क्षेत्र में पाया जाता है।
Recent Comments