जैसे शराब पीना मोह, नशा चढ़ना व्यामोह।
मोह तो ज्ञानी को भी हो सकता है पर उसे व्यामोह नहीं होगा।

निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

दान…
अकेले में दें तो गुप्त।
समारोह में बताकर ताकि औरों को प्रेरणा मिले, अनुमोदना करने का अवसर मिले और आप निमित्त बनें।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

देहरी के फायदे –>

  • देखकर चलोगे तो कीड़ों की भी रक्षा होगी।
  • बाहर के कीड़े अंदर नहीं आएँगे।
  • बाहर की -ve Energy अंदर आने से रुकेगी।

अब तो दरवाजों में देहरी होती ही नहीं।

आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी

सृष्टि इन तीनों से ही चलती है। यंत्र, मंत्र हमको मजबूत करते हैं, जंगली पौधे जैसे मुसीबतें झेलता हुआ बढ़ता रहता है।
तंत्र (साधन) कमज़ोर/पराधीन करता है, A. C. का पौधा है, धीरे-धीरे सूखता है।

निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

धर्म वो नहीं जो संकटों को टाल दे, बल्कि वो जो संकटों में सम्हाल ले।
देखा जाए तो धर्मात्माओं पर संकट आते तो है पर उनको छूते नहीं। क्योंकि संकट तो शरीर पर आते हैं और धर्मात्मा अपने आपको शरीर मानते नहीं, अपने को आत्मा ही मानते हैं।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

सीता जी पर अत्याचार नहीं, बल्कि ऊँचे स्थान पर बैठाने की प्रक्रिया थी जैसे साधुओं की कठिन साधना।
तभी तो आम आदमी सीता राम कहता है।

निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

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