क्या पैसा पुण्य से आता है ?
नहीं, यदि पुण्य से आता होता तो साधु को पुण्यहीन मानना पड़ेगा!
फिर ?
पुण्य की Background में पाप-क्रियाओं से कमाया जाता है।
साधु इस पुण्य को और पुण्य कमाने में लगाकर परमार्थ को बढ़ाते हैं।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

भक्त से भगवान…
भगवान के सामने बोलो/ अनुभव करो… “दासोहम्”।
अगले कदम पर “उदासोहम्” (संसार से)।
अंत में… “सोहम्”।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

सोलर पैनल जैसे होते हैं गुरु। अपनी Energy ख़ुद पैदा करते रहते हैं। फ़र्क यह है कि इनकी Energy रात/ सोते में भी चार्ज होती रहती है तथा शिष्य रूपी ग्रिड को भी Energy देते रहते हैं।

निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे, “पाप मल है, पुण्य जल है। मल धोने के लिए जल आवश्यक है।”

आचार्य श्री समयसागर जी

विचारों की यदि दिशा भटक जाए तो वह विकार बन जाते हैं।
एक बुढ़िया की कुटिया पड़ोसी ने हड़प ली। बुढ़िया ने निवेदन किया कि एक डलिया मिट्टी ले जाने दें ताकि उसकी खुशबू से परिवार सो सके। डलिया भारी थी पड़ोसी को निवेदन किया सिर पर रखवा दें। पड़ोसी उठा नहीं पाया।
बुढ़िया –> एक डलिया मिट्टी का बोझ नहीं उठा पा रहे हो, पूरी जमीन की मिट्टी का बोझ कैसे सहन कर पाओगे !

ब्र. डॉ. नीलेश भैया

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