Category: डायरी

बच्चों को नियम

आज पलायन बहुत हो रहा है। गांव से शहर, शहर से मेट्रो और मेट्रो से विदेश जाने होड़ लगी हुई है। बच्चों को बाहर भेजने

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ग्रहण/ त्याग

इंद्रियों आदि के कार्य… सिर्फ़ ग्रहण करते हैं… कान, आँख, नाक, रसना, स्पर्श इंद्रियां, माथा(आशीर्वाद), पैर (मंजिल) सिर्फ़ त्याग करते हैं… फेफड़े (गंदी हवा) ग्रहण

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तीन काल

भूतकाल Experience, वर्तमान Experiment(Based on Experience) , भविष्य Expectation. वर्तमान अपना, अपनाते नहीं, Feel करें; भूत और भविष्य Fail करें। मुनि श्री सौम्य सागर जी

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Thinking

Positive Thinking…जैसे आशीर्वाद मिलेगा ही। सोच को बदलते रहना चाहिए।अस्थाई। अपेक्षा सहित। Real Thinking…….जैसे गुरुओं/ बड़ों को नमस्कार हमेशा करूंगा, आशीर्वाद मिल भी सकता है

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मुक्ति

मुक्ति के दो प्रकार – रस्सियों (कर्मों की) को तोड़कर भागना। इसके लिए बलशाली होना पड़ेगा। जितने कर्म बंध रहे हैं, उससे ज्यादा तोड़ें। नयी

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विश्वसनीय

सबसे बड़ा विश्वसनीय कौन ? जो अच्छे और बुरे की जिम्मेदारी खु़द लेते हों और इसमें अग्रणी हैं, मुनिराज। जो अनजाने में हुई गलतियों के

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मोक्षमार्ग

मोक्षमार्ग में…. कारण …बीज/ संसार। पेड़ पौधे तक कारण हैं क्योंकि वे हमें संसार में जिंदा रखने में सहायक है। इसलिये उनके प्रति उदार-चित्त रखना

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बड़ा पापी

बड़ा पापी वह, जिसके मन से पश्चाताप का भाव ही समाप्त हो जाए। पश्चाताप से ही प्रायश्चित ग्रहण होता है। ब्र. (डॉ.) नीलेश भैया

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मंगल आशीष

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