Category: डायरी

देव दर्शन

भगवान की मूर्ति के दर्शन पहले खुली आँखों से करें, उनके रूप को अपने अंतस् में भर लें। फिर आँख बंद करके उस रूप का

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थाली में जूठन

थाली में जूठन छोड़ने से नकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है। अन्न को अन्य मत मानो। अपनी भूख पहचानो तभी अपने को पहचान पाओगे। किसी के

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परमात्मा बनने की विधि

परमात्मा बनने की विधि…. गुणवानों का गुणगान करने से खुद गुणवान बनेंगे तब धर्म जीवन में आएगा, धर्मात्मा हो जाएँगे। फिर पुण्यात्मा और उससे बन

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अपनी पहचान

एक समृद्ध गुरुकुल खुला। जो भी पढ़ने आता उससे एक ही प्रश्न किया जाता – “तुम कौन हो ?” बच्चे नाम बताते। योग्य नहीं हो।

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मोह

मोह ऐसा है जैसे मरुस्थल में सावन तो आया (दिखता/ लगता) पर पतझड़ न गया (आत्मा से मोह)। इनके पेड़ों पर सुख/ शांति के फल

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पथिक

बिना प्रमाद, श्वसन क्रिया सम, पथ में चलो। आचार्य श्री विद्यासागर सागर जी

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चरित्र

“परिहार” के दो अर्थ होते हैं एक ग्रहण करना, दूसरा छोड़ना। ग्रहण कर्तव्य का, छोड़ना अकर्तव्य का; और इन दोनों के होने से बनता है

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मैं

मैंने देखी, मैं की माया। मैं को खोकर, मैं ही पाया।। (रेनू – नयाबाजार मंदिर)

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लोगों के प्रकार

चार प्रकार के लोग…. 1) भाग्यवान… जिनके पास वर्तमान में धन वैभव हो। 2) सौभाग्यशाली… वैभव के साथ स्वास्थ्य भी अच्छा हो। 3) महा-सौभाग्यशाली… धन,

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तैयारी

घर से पर-घर जाने के लिए अच्छे कपड़े पहनते हैं। गाँव से पर-गाँव जाने के लिए तैयारी और ज्यादा, धन आदि रखना होता है। देश

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मंगल आशीष

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