Category: डायरी
रिश्ते
मैंने तो मज़ाक में रोकी थी अपनी साँस, रिश्ते खुले तो शर्म से मरना पड़ा मुझे। (अरविन्द)
शांति
आचार्य श्री विद्यासागर जी के पास एक व्यक्ति को लाया गया जो सुसाइड करना चाहता था। आचार्य श्री स्वाध्याय कर रहे थे। वह व्यक्ति बैठा
Empathy
अपने आप को सामने वाले की स्थिति में रखकर सोचना, Empathy कहलाता है। (एकता – पुणे)
शिष्य / भक्त
आचार्य श्री विद्यासागर जी अपने शिष्यों और भक्तों को सिंह बनाते थे, इसलिए हंटर जैसा अनुशासन रखते थे, श्वान नहीं जिसको पट्टा डालकर घुमाया जाए।
प्रतिध्वनि
हमारा संसार प्रतिध्वनियों का ही है, जिसे हम प्रतिपल जी रहे हैं। पाप कर्मों की भी प्रतिध्वनियां सताती हैं, क्रिया एक प्रतिक्रिया अनेक। यह सिद्धांत
स्वतंत्रता दिवस
1947 से पहले का भारत Physically गुलाम था, पर आज का भारत दिमागी तौर पर Ethically गुलाम है। गुणों का नीलाम होना ही गुलाम बनाता
भादों में सावधानी
इस भादों के मास में… छाछ का निषेध है, और तीखा खाना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान –
विरोधी
विरोधी को सहन नहीं करोगे तब तक प्रगति नहीं/अंतिम मंजिल मोक्ष नहीं। सारे महान लोगों तथा भगवानों तक ने विरोध को विनोद रूप में लिया
विचार
प्रगति में महत्त्वपूर्ण अवरोध, पूर्व के मूढ़ता वाले विचार होते हैं। उनसे हम डिगना/छोड़ना नहीं चाहते हैं। जब तक उनकी तेरहवीं नहीं करेंगे तब तक
कषाय
कषाय* की कसाहट अंदर ज्यादा होती है, बाहर कम दिखती। कषाय की सफाई कठिन है, उसके लिए साफ सुथरा स्थान रखना होगा जहाँ उसकी सम्मूर्छनों*
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