Category: डायरी

धर्म / धन

कठिन क्या है धर्म करना या धन कमाना ? प्राय: उत्तर मिलता है… धर्म करना कठिन है। पर कभी सोचा ! धन कमाने में कितना

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हार / जीत

ब्रह्म समाज के संस्थापक श्री रामकृष्ण परमहंस से चिढ़ते थे। एक दिन बोले –> मैं तुम्हें हराने आया हूँ। श्री रामकृष्ण लेटकर बोले –> लो

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संसार / मोक्ष

ज्ञान + मोह = संसार, ज्ञान – मोह = मोक्ष। आर्यिका श्री पूर्णमति माता जी (24 अक्टूबर)

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दुःख

कुछ दुःख Unavoidable होते हैं जैसे शारीरिक अस्वस्थता, आर्थिक, सामाजिक। पर ज्यादा दुःख Avoidable/ self-created/ हमारा चयन होता है, Actual में वे दुःख होते ही

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कर्म काटना

दिगंबर साधु तपस्या में लीन थे। चोर नग्न साधु को अपशकुन मानकर उपसर्ग करने लगा। उपसर्ग समाप्त होने पर साधु ने चोर से कहा –>

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प्रभु की खोज

प्रभु खोजने* से नहीं मिलते हैं। उनमें खो-जाने** से मिलते हैं। (डॉ. सविता उपाध्याय) * ज्ञान। ** श्रद्धा/ भक्ति।

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व्यक्ति / अभिव्यक्ति

प्रश्न यह नहीं कि शक्ति कितनी है, सामग्री या संपत्ति कितनी है! प्रश्न है कि व्यक्ति कैसा है? यह तीनों साधन तो अधम को भी

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अनादर

यदि कोई एक बार हमारा अनादर कर देता है, तो उस अनादर को हम सौ बार दोहराते हैं। यदि वह दंड का अधिकारी है, तो

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ज्ञानी

जो चीज़ों को नज़रअदाज़ करे/ करने का प्रयास करे, वही ज्ञानी। ब्र. डॉ. नीलेश भैया

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संसार-चक्र

शेर की मांद के बाहर जानवरों के आने के ही पदचिह्न दिखते हैं, लौटने के नहीं। संसार में एक बार घुसने पर विरले ही निकल

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मंगल आशीष

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